धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कारण - इतिहास पुस्तकों का तथ्यों से जोड़ना ?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कारण - इतिहास पुस्तकों का तथ्यों से जोड़ना ?

नीट विवाद के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद अब एक नई राजनीतिक बहस सामने आ रही है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों को लेकर समर्थकों का एक वर्ग मानता है कि विरोध केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि इतिहास और शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधार भी इसके पीछे एक बड़ा कारण थे।

पिछले कुछ वर्षों में एनसीईआरटी ने इतिहास की पुस्तकों में कई संशोधन किए। मुगल काल से जुड़े कुछ अध्यायों को संक्षिप्त किया गया, जबकि मौर्य, सातवाहन, चालुक्य, पल्लव, राष्ट्रकूट जैसे भारतीय राजवंशों, भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्योतिर्लिंग, चारधाम, महाकुंभ और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों को अधिक स्थान दिया गया।

दशकों तक भारतीय इतिहास में विदेशी शासकों को अपेक्षाकृत अधिक महत्व दिया गया, जबकि भारत की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक उपलब्धियों को पर्याप्त स्थान नहीं मिला। पाठ्यक्रम में हुए इन परिवर्तनों से असहमत कुछ राजनीतिक और वैचारिक समूह लगातार शिक्षा मंत्रालय पर दबाव बना रहे थे।

इसी कारण अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ चला अभियान केवल नीट विवाद तक सीमित था, या फिर इतिहास और शिक्षा सुधारों को लेकर चल रही वैचारिक लड़ाई भी इसके केंद्र में थी।